*एक छोटा सा घर हो अपना*
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*एक प्यार करने वाला पति, एक फूल सी बेटी, एक छोटा सा घर हो अपना,,,*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*सुबह की पहली किरन जब उगे, तो भीगे बालों की लटों को झुका कर उनके चेहरे पर, चाय पीने को उनको जगाऊं*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*अचानक 'मम्मा' की आवाज हो, और आँखें मलते वो फूल सा खिला चेहरा, पीछे से आंचल मेरा हिलाए,,, और फिर हम-दोनों की बाहों में आकर सिमट जाए*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*फिर शुरू हो जिम्मेदारियों की दौड़-भाग,,,किचन में अपनी जान और जानम के लिये तैयार करूं, प्यार से नाश्ता और टिफिन*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*किचन से लगे डाइनिंग टेबल पर प्यार से परोसूं नाश्ता,,,और दोनों को अपने हाथों से खिलाऊं, फिर एक नन्हा और बड़ा कौर उनके हाथों से खाकर मैं भी तृप्त हो जाऊं*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*बेटी को यूनिफॉर्म और उनको टाई पहनाऊं, तैयार होकर जब दोनों निकलें ऑफ़िस और स्कूल जाने को, तो गेट पर खड़ी होकर आँखों से ओझल होने तक घंटों हाथ हिलाऊ*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*भीतर आकर फिर से लग जाऊं, अपने काम में,,, बेटी के बिखरे खिलौनों को उसकी अलमारी में सजाऊं, और उनकी फाइलों और किताबों को करीने से लगाऊं*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*सम्भालूं उनकी हर एक चीज को जो घर में इधर-उधर बिखरी हों, और फिर बिस्तर पर पड़ी चादर की सिलवटो को देखकर कुछ पल के लिये खो जाऊं उन खुशनुमा खयालों में, जिन्होंने रात को डाली थीं सिलवटें उस चादर में*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*दिन गुजरे, और शाम हो,,,वो आएं ऑफ़िस से मुस्कुरा कर करूं उनका दरवाजे पर इन्तजार,,, प्यार की मिठास भरी एक कप चाय लेकर जब पास जाऊं उनके, तो तलब चाय से ज्यादा उनको मेरी हो*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*अपनी नन्ही परी को कराऊं होम वर्क, फिर खिलाऊं उसे खाना और लोरी सुनाकर प्यार से सुलाऊं*
बस यही देखा था एक सपना।।।
*किचन में अगली सुबह की तैयारियां कर, जब रात को जाऊं कमरे में, तो वो बाहों में भरने और प्यार की बारिश करने को कर रहे हों बेसब्री से इंतजार,,,और फिर से पड़ जायें चादर पर सिलवटें अगली सुबह के लिए*
बस यही देखा था एक सपना।।।
ऐसा ही हो बस एक छोटा सा घर अपना!!!
✍🏻*कुसुम 'कामनी'*💞